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पेटा की जमीन पर बेच रहे आवासीय भूखंड, सैंकडों डम्पर मिट्टी से भर दी तलाई

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-मास्टर प्लान के लिए विधानसभा में उलझ रहा पक्ष-विपक्ष, यहां बेखौफ भू माफिया

झालावाड। शहरों के मास्टर प्लान को लेकर विधानसभा में भले ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हो रही हो लेकिन नगरीय प्रशासन ने तो अवैध कॉलोनियों की बसावट के लिए भू माफियाओं को खुली छूट दे रखी है। शहर की पेटा काश्त, कृषि भूमि सहित तालाबों की जमीनों पर खुलेआम मलबा भराव करके भूखंड बेचे जा रहे हैं लेकिन क्या मजाल कि नगर पालिका से कोई कारिंदा वहां जाकर चूं बोल दे। 

विधानसभा में भले ही पूर्व यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल और सत्ता पक्ष की ओर से मंत्री खर्रा और कृपलानी के बीच तीखी बहस हो चुकी हो। लेकिन इस बहस का नीचे तक कोई असर नहीं हो रहा। सरकारी कारिंदों की कार्यशैली वही की वही है। खुले आम शहर का नक्शा बिगाडा जा रहा है लेकिन कार्रवाई के नाम पर एक दूसरे पर टाल रहे हैं। मामला है मोटर गैराज के निकट धनवाडा तिराहे का। यहां भैरूजी मंदिर के पास कुछ माह पहले तक एक तलाई हुआ करती थी। ये तलाई रिकार्ड में पेटा के नाम से दर्ज है। जिसमें पेटा काश्त करने के लिए खातेदारों के नाम है। जिसे कुछ महीनों से भूमाफियाओं ने मिट्टी डालकर समतल कर दिया है। इतना ही नहीं हरिजन बस्ती और मोटर गैराज की ओर से आने वाले शहरी नाले को भी दीवार बनाकर कर छोटा कर दिया। जबकि बरसात में इस नाले में पानी का बहाव बहुत अधिक रहता है। 

भू माफियाओं ने यहां भूखंड काट दिए और सडकों के लिए चारदीवारी कर दी। सडक की ओर आवासीय कॉलोनी का बोर्ड लगाकर भूखंडों की बिक्री की जा रही है। लेकिन आज तक नगर परिषद प्रशासन के किसी अधिकारी और कारिंदों ने इसे रोकने की जहमत नहीं उठाई। जनता के वोटों से चुने जाने वाले वार्ड पार्षद से लेकर सभापति तक ऐसे अवैध निर्माणों को रोकने के प्रति सतर्क नहीं है। 

बिना भू रूपांतरण नहीं बेच सकते आवासीय भूखंड

शहर में कोई भी आवासी कॉलोनी में भूखंड विक्रय करने के लिए कृषि भूमि को आवासीय में भू रूपांतरण कराना आवश्यक है। जबकि किसी भी प्रकार की वेटलैण्ड और ग्रीनलैण्ड श्रेणी की जमीन और जमीन का भू उपयोग परिवर्तन किया ही नहीं जा सकता। पेटा काश्त ऐसी ही श्रेणी में आता है। जो तालाब, झील आदि के पेटे में किसानों को खेती करने के लिए स्वीकृति के तौर पर दिया जाता है। जिसकी शर्त यह है कि उस तालाब-जलाशय का प्राकृतिक स्वरूप नष्ट किए बगैर वहां मौसम के अनुकूल फसल उगाई जा सकती है। जलाशय में पानी भरा रहने पर सिंघाडे या कमल जैसी खेती की जा सकती है और गर्मी में पानी कम होने पर खाली हुई भूमि पर ककडी-खरबूजा या अन्य फसल उगाई जा सकती है। लेकिन जलाश्य के पानी को बहाना या उसमें मिट्टी भराव करना आपराधिक श्रेणी में आता है। जो स्पष्ट तौर पर जोधपुर उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ है। न्यायालय ने ऐसे मामलों में स्थानीय प्रशासन की भी जिम्मेदारी तय है। 

-पेटा श्रेणी की जमीन को आवासीय कॉलोनी के लिए यूज नहीं किया जा सकता। मैं अतिक्रमण शाखा प्रभारी को बोलकर कार्रवाई करवाता हूं। 

नरेन्द्र मीणा, 

कार्यवाहक आयुक्त , नगर परिषद, झालावाड।

-मैंने अभी एक महीने पहले ही चार्ज लिया है इसलिए मुझे इसका ज्यादा आइडिया नहीं है। फिर भी मैं पता करके कार्रवाई करता हूं। 

भावेश रांकावत, 

 

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Pradyumn Sharma: A Dedicated Voice in Journalism Pradyumn Sharma is a prominent journalist known for his significant contributions to the field of journalism through his work with "Styarth Kranti," a media outlet dedicated to spreading awareness about important societal issues. With a keen sense of investigative reporting and a passion for uncovering the truth, Sharma has made a name for himself as a reliable source of information.


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