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बंद कर दिया वॉकिंग ट्रेक के पास का नाला, अवैध कॉलोनी के लिए भरा मलबा

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-कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनी

-दो माह पूर्व जिला कलक्टर ने किया था निरीक्षण 

झालावाड। जिला कलक्टर ने दो माह पूर्व ही गांवडी तालाब के निकट वॉकिंग ट्रेक का निरीक्षण कर आसपास के नालों को खुलासा करने के निर्देशा प्रशासनिक अधिकारियों को दिए थे। लेकिन पुराने सरकारी नाले को खुलासा करना तो दूर वॉकिंग ट्रेक के निकट ही दूसरे नाले को भी एक भूमाफिया ने मलबे से भर दिया है। नगर पालिका के दो दो बार दिए जा चुके नोटिस भी इस भू माफिया ने हवा में उड़ा दिए।

हाउसिंग बोर्ड के निकट आईडीएसएमटी कॉलोनी के पास एक कृषि भूमि को गैर कृषि उपयोग के लिए तैयार किया जा रहा है। यहां जमीन को समतल कर सडकें बनाने और आवासीय प्रयोजन से भूखंड बेचने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए भू माफियाआंे ने इस खातेदार की जमीन के आसपास की सरकारी जमीन को भी अपने कब्जे में ले रखा है। साथ ही वॉकिंग ट्रेक के पास स्थित सरकारी नाले मंे कोटा स्टोन का मलबा भरा जा रहा है। अब तक दर्जनों ट्रॉली मलबा भरा जा चुका है।

आवासीय भूखंड में बना दिया रास्ता

भू माफिया ने इस कृषि खातेदारी जमीन पर आवासीय उपयोग के लिए अवैध तरीके से भूखंड बेचने के लिए एक और गैर कानूनी तरीका अपनाया है। इस भूमि पर जाने के लिए आइडीएसएमटी के एक आवासीय भूखंड को खरीद कर उस पर से रास्ता बनाया जा रहा है। जबकि आईडीएसएमटी कॉलोनी नगर परिषद की ओर से बसाई गई कॉलोनी है। इसमें आवासीय भूखंड का उपयोग केवल आवासीय मकान बनाने के लिए ही किया जा सकता है। यदि इस उपयोग किसी व्यावसायिक परियोजना या गैर कानूनी गतिविधि के लिए रास्ता बनाने में किया जा रहा है तो नगर परिषद को इसे जब्त कर किसी अन्य को आवंटित करने का अधिकार है।   

यह है नियम

नियम यह है कि किसी भी कॉलोनाइजर को कॉलोनी विकसित करने से पहले कृषि भूमि का लैण्ड यूज चेंज कराना होता है। जिसके बाद टाउन प्लानर से कॉलोनी का नक्शा पास कराना पडता है। जिसमें 40 प्रतिशत भूमि सडक, पार्किंग, पार्क सहित अन्य जनोपयोगी कार्यों के लिए आरक्षित करनी होती है। साथ ही सडक, पार्क, बिजली के खंभे जैसी सुविधाएं विकसित करनी होती है। जिसके बाद भूखंड बेचान पर नगर पालिका पट्टे जारी करती है। 

सरकार निरस्त कर सकती है कृषि भूमि की लीज

राजस्थान काश्तकारी अधिनियम के तहत समस्त कृषि भूमि खातेदार को राज्य सरकार की ओर से कृषि उपयोग के लिए लीज पर दी गई। जिसके नामांतरण और बेचान आदि का अधिकार नियमानुसार उन्हें दिया गया है। लेकिन भूमि की श्रेणी के अलावा अन्य उपयोग करने पर राज्य सरकार खातेदार के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। जिसके तहत राजस्थान काश्तकारी अधिनियम की धारा 175-177 के तहत कार्रवाई कर इसे सिवाय चक में दर्ज कर राजसात किया जा सकता है। ऐसी कार्रवाईयां पूर्व में राज्य सरकार द्वारा कई स्थानांे पर की जा चुकी है।

 कर्मचारियों की मिलीभगत 

 

भूमाफिया और सरकारी कारिंदों की मिलीभगत से अवैध कॉलोनियों का मायाजाल बढ़ता जा रहा है। जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान तो ही रहा साथ ही आम इंसान भी इन अनधिकृत कॉलोनियों में सुविधाओं के नाम पर ठगे जा रहे है। नगर पालिका अधिकारी इनको रोकने के नाम पर कुछ नोटिस जारी करते है लेकिन वहां हो रहे अवैध निर्माणों को तोडने का नाम नहीं लेते। वहीं राजस्व अधिकारी भी कृषि भूमि का गैर कृषि प्रयोजन से उपयोग करने पर ठोस कार्रवाई करते। कई मामलों में तो ऐसी कॉलोनियों में सरकारी कारिंदों की पार्टनरशिप या भूखंडांे में हिस्सेदारी सामने आ रही है। 

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Pradyumn Sharma: A Dedicated Voice in Journalism Pradyumn Sharma is a prominent journalist known for his significant contributions to the field of journalism through his work with "Styarth Kranti," a media outlet dedicated to spreading awareness about important societal issues. With a keen sense of investigative reporting and a passion for uncovering the truth, Sharma has made a name for himself as a reliable source of information.


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