
रेपिड कार्ड में कमीशन का खेल, मरीजों की जिंदगी दांव पर
Bloodbank
-झालावाड मेडिकल कॉलेज
-ब्लड बैंक में दो माह से मशीन खराबी के पीछे कारण कुछ और
झालावाड। झालावाड मेडिकल कॉलज के ब्लड बैंक में गत दो माह से एलाइजा मशीन को खराब बताकर रेपिड कार्ड से रक्त की जांच की जा रही है। जबकि मशीन खराबी के के पीछे असल में रेपिड कार्ड की खरीद में भारी कमीशन का खेल है।
झालावाड मेडिकल कॉलेज में गत दो माह से एलाइजा टेस्ट की मशीन खराब बताई जा रही है। रोजाना दर्जनो यूनिट रक्त की जरूरत होने के बावजूद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इस मशीन को आखिर ठीक कराने की जहमत नहीं उठाई। जबकि बिना एलाइज टेस्ट के रक्त रोगियों को नहीं चढाया जा सकता। इधर ब्लड बैंक प्रशासन मशीन को ठीक कराने की तत्परता दिखाने के बजाय रेपिड कार्ड से ब्लड सेम्पलों की टेस्ट कर रहा है। जिसके कारण बड़ी संख्या में रेपिड कार्ड की खरीद की जा रही है।
नियमित प्रक्रिया नहीं है रेपिड कार्ड
रेपिड कार्ड से रक्त की जांच प्रक्रिया आपतकालीन परिस्थितियों के लिए होती है, न कि नियमित। यह कार्ड दूर दराज के स्थानों पर रोगी को रक्त चढाने से पूर्व इमरजेंसी जांच के लिए होते हैं। जिसमंे एचआईवी, सिफलिस, डेंगू, हेपेटाइटिस बी और सी जैसे रोगों को अलग अलग कार्ड से जांच कर रक्त तुरंत रोगी को चढाया जा सकता है। लेकिन झालावाड मेडिकल कॉलेज में विभिन्न रोगों की हाईटेक जांच मशीनें लगी होने के साथ उच्च स्तरीय माइक्रोबायलॉजी और बायोकेमिस्ट्री प्रयोगशालाएं उपलब्ध है। इसके बावजूद इन मशीनों का उपयोग करने के बजाय प्राथमिक तकनीक का लंबे समय तक उपयोग करना किसी बडी साजिश या अनियमितता का संदेह प्रकट करती है।
Share this news
Comments